राम-राम किसान भाईयों! सरसों के बाद, गेहूं हमारे देश की सबसे मुख्य रबी फसल है। हर किसान की यही कोशिश रहती है कि वह गेहूं की ऐसी किस्म लगाए और इस तरीके से खेती करे, जिससे पैदावार के सारे रिकॉर्ड टूट जाएं।
अक्सर किसान पुरानी किस्मों का बीज बार-बार इस्तेमाल करते हैं, जिससे न सिर्फ पैदावार घटती है बल्कि पीला रतुआ (Yellow Rust) जैसी बीमारियां भी लग जाती हैं। आज हम जानेंगे गेहूं की खेती के 5 ऐसे वैज्ञानिक तरीके और नई किस्मों के बारे में, जो आपको एक एकड़ में 25 से 30 क्विंटल तक की शानदार पैदावार दे सकती हैं।
1. गेहूं की बुवाई का सबसे सही समय
गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए तापमान का सही होना बहुत ज़रूरी है।
- अगेती बुवाई (Early Sowing): 25 अक्टूबर से 15 नवंबर का समय गेहूं की अगेती बुवाई के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है। इस समय बोई गई फसल को पकने के लिए पूरा समय मिलता है और दाना मोटा होता है।
- पछेती बुवाई (Late Sowing): अगर आप धान, नरमा या गन्ना काटने के बाद खेत तैयार कर रहे हैं, तो 25 नवंबर से 25 दिसंबर तक पछेती बुवाई कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए बीज की मात्रा थोड़ी बढ़ानी पड़ती है।
2. गेहूं की टॉप 5 बंपर पैदावार वाली नई किस्में
कृषि वैज्ञानिकों ने हाल ही में कुछ ऐसी किस्में तैयार की हैं जो गर्मी (Heat wave) को भी सहन कर सकती हैं और पैदावार भी छप्पर फाड़ कर देती हैं:
- DBW 327 (करण शिवानी): यह अगेती बुवाई और सिंचित परिस्थितियों के लिए विकसित उच्च पैदावार वाली किस्म है। अनुशंसित क्षेत्रों में इसकी दर्ज उपज 79.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
- DBW 187 (करण वंदना): यह किस्म अच्छी चपाती गुणवत्ता और दाने में अधिक आयरन के लिए जानी जाती है।
- DBW 303 (करण वैष्णवी): यह अगेती बुवाई के लिए एक बेहतरीन किस्म है।
- HD 3226 (पूसा यशस्वी): यह पीला, भूरा और काला रतुआ सहित गेहूं की कई प्रमुख बीमारियों के प्रति उच्च प्रतिरोध रखती है।
- HD 2967: हालांकि यह थोड़ी पुरानी हो गई है, लेकिन आज भी किसानों के बीच बहुत भरोसेमंद किस्म है।
3. बीज उपचार (Seed Treatment) है सबसे ज़रूरी
बुवाई से पहले बीज का उपचार करने से फसल में कंडवा (Smut) और दीमक की समस्या नहीं आती।
- तरीका: 1 किलो बीज को 1.5 ग्राम 'टेबुकोनाज़ोल' (Tebuconazole 2% DS) या 'कार्बेन्डाजिम' दवा से उपचारित करें। दीमक से बचाव के लिए 'क्लोरोपायरीफॉस' (Chlorpyrifos) का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
- बीज की मात्रा: अगेती बुवाई में 40-45 किलो प्रति एकड़ और पछेती बुवाई में 50 किलो बीज प्रति एकड़ डालें।
4. खाद का सही गणित (जिंक का कमाल)
गेहूं की फसल को यूरिया और डीएपी के साथ-साथ जिंक (Zinc) की बहुत ज़रूरत होती है। जिंक से पौधों का फुटाव (Tillering) ज़्यादा होता है और बालियां लंबी बनती हैं।
- बुवाई के समय: खाद की मात्रा मिट्टी की जांच, सिंचाई, पिछली फसल और राज्य की कृषि सिफारिश के अनुसार तय करें। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की मात्रा भी खेत की जरूरत के हिसाब से रखें।
- जिंक का इस्तेमाल: ध्यान रहे, जिंक को कभी भी डीएपी के साथ मिलाकर न डालें, दोनों आपस में रिएक्शन करके पत्थर बन जाते हैं। जिंक की कमी मिलने पर 21% या 33% जिंक सल्फेट की मात्रा उसके formulation और स्थानीय सिफारिश के अनुसार दें। (सही खाद का अंदाज़ा लगाने के लिए अपने खेत की मिट्टी की जांच अवश्य कराएं।)
5. पहला पानी: क्राउन रूट (CRI) स्टेज
गेहूं में पहली सिंचाई उसकी पूरी ज़िंदगी तय करती है। गेहूं की फसल में पहला पानी बुवाई के ठीक 21 दिन बाद लगाना चाहिए। इस समय पौधे में 'क्राउन रूट' (ताज वाली जड़ें) बनती हैं। अगर इस समय पानी देने में देरी हुई, तो पौधे में नए कल्ले (फुटाव) नहीं निकलेंगे और पैदावार आधी रह जाएगी।
निष्कर्ष
किसान भाईयों, अगर आप सही समय पर इन नई किस्मों का चुनाव करते हैं और पहले पानी का ध्यान रखते हैं, तो गेहूं की पैदावार निश्चित तौर पर बढ़ेगी। खेती से जुड़ी और भी काम की जानकारी और रोज़ाना ताज़ा मंडी भाव जानने के लिए हमारी वेबसाइट FasalBhav.in पर रोज़ाना विजिट करें।
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