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अमरूद का भाव आज | Guava Mandi Price Today
अमरूद के आज के उपलब्ध मंडी भाव देखें—रामगंज मंडी, भिवानी और हिसार के मॉडल, न्यूनतम और अधिकतम रेट और प्रति किलो भाव।
नीचे मंडी-वार सूची में अमरूद के उपलब्ध भाव दिए हैं। मंडी के नाम पर क्लिक करके उस मंडी की दूसरी फसलों के भाव भी देख सकते हैं।
अमरूद के मंडी भाव को प्रभावित करने वाले कारक
राम राम किसान भाइयों! भारतीय बागवानी और फल मंडियों में अमरूद (Guava) सबसे लोकप्रिय, पौष्टिक और किसानों को नियमित रूप से बंपर मुनाफा देने वाली प्रमुख नकदी फल फसल है। उत्तर प्रदेश (प्रयागराज/इलाहाबाद, बदायूं), राजस्थान (सवाई माधोपुर, जयपुर, जोधपुर) और मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ क्षेत्र के उत्पादकों के लिए अमरूद केवल एक मौसमी फल नहीं, बल्कि सर्दियों की मजबूत आर्थिक रीढ़ है। घरेलू रसोई में ताजे फल के सेवन से लेकर जैम, जेली और फ्रूट जूस प्रोसेसिंग यूनिट्स तक अमरूद की जबरदस्त मांग रहती है। यही कारण है कि फल-सब्जी मंडियों में इसकी नीलामी हमेशा तेज रहती है और किसान भाई व फल विक्रेता रोजाना यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि आज अमरूद का क्या भाव है, 1 किलो अमरूद की कीमत क्या चल रही है और देश की प्रमुख थोक मंडियों में बाजार का रुख कैसा है।
अमरूद की प्रमुख किस्में: सफेदा, ताइवान पिंक और वीएनआर का मंडी में मुकाबला
मंडी में व्यापारी और आढ़ती केवल ढेर की चमक देखकर बोली नहीं लगाते, बल्कि अमरूद की वैरायटी, फल के वजन और गूदे के रंग के आधार पर प्रीमियम भाव तय करते हैं:
- सवाई माधोपुर व इलाहाबादी सफेदा (Allahabadi Safeda): राजस्थान के सवाई माधोपुर का अमरूद अपनी बेजोड़ मिठास, पतले छिलके और सफेद मक्खन जैसे गूदे के लिए पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध है। पारंपरिक रूप से इलाहाबादी सफेदा और सवाई माधोपुर के अमरूद की मांग दिल्ली, जयपुर और जोधपुर की फल मंडियों में सबसे पहले निकलती है। इसका स्वाद उत्तम होने के कारण स्थानीय और खुदरा बाजारों में इसका उठान सबसे तेज रहता है।
- ताइवान पिंक और वीएनआर बिही (VNR Bihi - जंबो साइज): यह व्यावसायिक बागवानी की आधुनिक और सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाली किस्में हैं। इनका फल आकार में बहुत बड़ा (300 ग्राम से लेकर 800 ग्राम तक), कम बीजों वाला और अंदर से हल्का गुलाबी होता है। कड़क छिलके और 7 से 10 दिनों की लंबी शेल्फ लाइफ के कारण बड़े शहरों के सुपरमार्केट्स और निर्यातकों द्वारा इस अमरूद की सबसे ऊंची बोली लगाई जाती है। मंडियों में ताइवान पिंक को सामान्य अमरूद से ₹15 से ₹30 प्रति किलो तक अधिक भाव मिलता है।
- लखनऊ सरदार (एल-49 / L-49): यह किस्म खुरदुरे छिलके, भरपूर मिठास और भारी पैदावार के लिए जानी जाती है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बागों में इसका उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और थोक मंडियों में इसका औसत मॉडल भाव हमेशा स्थिर बना रहता है।
1 किलो में कितने अमरूद होते हैं और साइज ग्रेडिंग का गणित
उपभोक्ताओं और फल उत्पादकों के बीच अक्सर यह सवाल रहता है कि 1 किलो में कितने अमरूद चढ़ते हैं? थोक मंडी की नीलामी और खुदरा बिक्री में फलों की संख्या उनके आकार (Size Grading) पर निर्भर करती है:
- सुपर जंबो ग्रेड (ताइवान पिंक / वीएनआर): इस ग्रेड में 1 अमरूद का वजन 350 से 500 ग्राम या उससे अधिक होता है। यानी 1 किलो में केवल 2 से 3 अमरूद ही आते हैं। यह फल गिफ्ट हैंपर्स और बड़े मॉल्स में प्रीमियम दरों पर बिकता है।
- टेबल / मीडियम साइज (सफेदा व एल-49): दैनिक खान-पान के लिए सबसे पसंदीदा आकार, जिसमें 1 फल का वजन 150 से 250 ग्राम तक बैठता है। इस साइज में 1 किलो में 4 से 6 अमरूद चढ़ते हैं। खुदरा बाजार और ठेलों पर सबसे ज्यादा बिक्री इसी साइज की होती है।
- छर्री / छोटा साइज: 100 ग्राम से छोटे आकार वाले अमरूद, जिसमें 1 किलो में 7 से 10 अमरूद आते हैं। इन्हें मुख्य रूप से जैम-जूस प्रोसेसिंग फैक्ट्रियों द्वारा न्यूनतम थोक भाव पर उठाया जाता है।
अमरूद की 'बहार' और मौसमी चक्र: सर्दियों के अमरूद में रिकॉर्ड तेजी क्यों?
अमरूद के पेड़ साल में दो से तीन बार फल देते हैं, लेकिन मंडी भाव में मौसम के अनुसार जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिलता है:
- बरसाती अमरूद (मृग बहार - जुलाई से सितंबर): मानसून के मौसम में पकने वाले अमरूद में पानी की मात्रा अधिक होती है, मिठास कम बैठती है और फल मक्खी (Fruit Fly) व कीड़े लगने का भारी जोखिम रहता है। जल्दी सड़ने के कारण व्यापारी बरसाती अमरूद पर जोखिम लेने से बचते हैं, जिससे थोक भाव साल के सबसे निचले स्तर पर रहते हैं।
- सर्दियों का अमरूद (हस्त बहार - नवंबर से फरवरी): अमरूद उत्पादक किसानों के लिए यह 'गोल्डन सीजन' होता है। रात की ठंडक और दिन की धूप से फल एकदम बेदाग, कड़क, रोगमुक्त और प्राकृतिक रूप से अत्यधिक मीठा तैयार होता है। इस मौसम में घरेलू मांग चरम पर होती है और दूर-दराज के राज्यों में परिवहन सुरक्षित रहता है, जिसके चलते सर्दियों में अमरूद का मंडी भाव आज का मॉडल रेट सबसे ऊंचे स्तरों पर पहुंचता है।
देश के प्रमुख अमरूद व्यापार केंद्र और मंडियों का कनेक्शन
अमरूद के देशव्यापी बाजार भाव की दिशा तय करने में कुछ प्रमुख राज्यों की मंडियों की अहम भूमिका होती है:
- सवाई माधोपुर और जोधपुर (राजस्थान): राजस्थान में अमरूद का मंडी भाव तय करने में सवाई माधोपुर की स्थानीय बागवानी बेल्ट सबसे आगे है। वहीं मारवाड़ क्षेत्र के सबसे बड़े वितरण केंद्र जोधपुर (फल और सब्जी) मंडी में पश्चिमी राजस्थान, गुजरात सीमा और उत्तर भारत से आने वाले अमरूद की दैनिक आवक से मजबूत व्यापार चलता है।
- उत्तर प्रदेश की मंडियां (प्रयागराज व पश्चिमी यूपी): उत्तर प्रदेश में अमरूद का मंडी भाव पूरे उत्तर भारत के रेट को प्रभावित करता है। प्रयागराज और कौशांबी बेल्ट से निकलने वाली गाड़ियों का रुख सीधे दिल्ली की आजादपुर मंडी और लखनऊ तक रहता है।
- मध्य प्रदेश की मंडियां: मध्य प्रदेश में अमरूद का मंडी भाव इंदौर, उज्जैन और भोपाल की थोक मंडियों की दैनिक आवक पर टिका होता है, जहां से माल महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के शहरों के लिए भी लोड किया जाता है।
थोक कैरट (Crate) और 1 किलो के खुदरा रेट में अंतर की वजह
किसान भाई अक्सर तुलना करते हैं कि जब मंडी में उनकी 20 किलो की क्रेट औसतन ₹25 से ₹35 प्रति किलो के थोक भाव में बिकी, तो शहर के बाजारों में 1 किलो अमरूद की कीमत ₹60 से ₹90 तक क्यों पहुंच जाती है? इसके पीछे 3 ठोस कारण हैं:
- सॉफ्ट होने और दबने का नुकसान (Spoilage Loss): अमरूद पकने के बाद बहुत जल्दी नरम पड़ता है। क्रेट के नीचे दबे हुए 2 से 3 किलो फल यात्रा के दौरान पिचक जाते हैं या उन पर काले निशान पड़ जाते हैं, जिन्हें खुदरा दुकानदार को कौड़ियों के भाव बेचना पड़ता है।
- फोम नेट और सुरक्षित पैकेजिंग खर्च: प्रीमियम क्वालिटी अमरूद (जैसे ताइवान पिंक) को दाग-धब्बों से बचाने के लिए प्रत्येक फल पर फोम नेट की जाली लगाई जाती है। इस सुरक्षित पैकिंग और पल्लेदारी का खर्च प्रति किलो लागत को बढ़ा देता है।
- लोकल ट्रांसपोर्ट और खुदरा रिस्क: थोक मंडी से शहर के अलग-अलग चौराहों और कॉलोनियों तक लाने का टेम्पो भाड़ा और फल के बासी होने का जोखिम खुदरा व्यापारी अपने मार्जिन में जोड़कर चलता है।
मंडी में अमरूद का सबसे ऊंचा (प्रीमियम) भाव पाने के 4 व्यावहारिक सुझाव
- तुड़ाई की सही अवस्था (कच्चा-पक्का नियम): अमरूद को पेड़ पर पूरी तरह पीला पड़ने तक न छोड़ें। जब फल का गहरा हरा रंग हल्का होकर चमकदार हल्का हरा या पीलापन लेने लगे और फल कड़क हो, तभी तुड़ाई करें। यह कड़क अवस्था लंबी दूरी के परिवहन में सुरक्षित रहती है और मंडी पहुंचते-पहुंचते बेहतरीन रंग पकड़ती है।
- सुबह या शाम की ठंडी तुड़ाई: दोपहर की तेज धूप में अमरूद कभी न तोड़ें। धूप में तोड़ा गया फल अंदर से गर्म रहता है, जिससे कैरट में बंद होते ही वह तेजी से पसीजता है और उसके छिलके पर काले धब्बे आने लगते हैं।
- जालीदार क्रेट में पेपर या फोम की परत: प्लास्टिक कैरट में अमरूद भरते समय नीचे और किनारों पर अखबार की रद्दी या फोम की शीट जरूर लगाएं। इससे परिवहन के दौरान फल आपस में रगड़ नहीं खाते और छिलके की प्राकृतिक चमक जस की तस बनी रहती है।
- साइज के आधार पर सख्त छंटाई (Grading): मोटे, मध्यम और छोटे दागी अमरूद को कभी भी एक ही क्रेट में न मिलाएं। बड़े और एक समान आकार वाले लॉट को अलग पैक करें; खरीदार ऐसे लॉट को देखते ही बिना झिझक के सबसे ऊंची बोली लगाते हैं।
अमरूद का थोक बाजार पूरी तरह फल की ताजगी, छिलके की चमक, कड़कपन और मौसम की अनुकूलता पर निर्भर करता है। अपने नजदीकी और राज्य की प्रमुख थोक मंडियों के दैनिक मॉडल भाव और आवक के रुख पर नजर रखकर समय पर माल निकालने से किसान भाई अपनी मेहनत का सबसे बेहतरीन और पूरा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।