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हरी मटर का भाव आज | Green Peas Mandi Price Today
हरी मटर के आज के उपलब्ध मंडी भाव देखें—रामगंज मंडी, रतलाम, आदमपुर और गन्नौर के मॉडल, न्यूनतम और अधिकतम रेट और प्रति किलो भाव।
नीचे मंडी-वार सूची में हरी मटर के उपलब्ध भाव दिए हैं। मंडी के नाम पर क्लिक करके उस मंडी की दूसरी फसलों के भाव भी देख सकते हैं।
हरी मटर के मंडी भाव को प्रभावित करने वाले कारक
राम राम किसान भाइयों! सर्दियों के मौसम और रबी नकदी फसलों में हरी मटर (Green Peas) किसानों के लिए सबसे कम समय में बंपर मुनाफा देने वाली फसल मानी जाती है। शादी-ब्याह के सीजन, रोजमर्रा की रसोई, बड़े होटलों और फ्रोजन मटर (सफल मटर) बनाने वाली प्रोसेसिंग कंपनियों में इसकी अटूट मांग रहती है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड बेल्ट से लेकर छत्तीसगढ़ की बिलासपुर मंडी और दंतेवाड़ा तक हरी मटर का थोक व्यापार बहुत बड़े पैमाने पर चलता है। किसान भाई और स्थानीय व्यापारी हर दिन यह जानने के लिए सक्रिय रहते हैं कि आज मंडियों में हरी मटर का क्या भाव चल रहा है, प्रमुख उत्पादक मंडियों में आवक की क्या स्थिति है और आने वाले दिनों में बाजार का रुख कैसा रहेगा।
बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश: देश के सबसे बड़े मटर हब का असर
हरी मटर के देशव्यापी थोक भाव तय करने में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की मंडियों का सबसे बड़ा दबदबा रहता है:
- जबलपुर मंडी (मध्य प्रदेश): जबलपुर को देश में हरी मटर की राजधानी कहा जाए तो गलत नहीं होगा। मध्य प्रदेश में हरी मटर का भाव (Hari matar ka bhav MP) और जबलपुर मंडी में आज हरी मटर का क्या भाव है, इस पर पूरे उत्तर और दक्षिण भारत के व्यापारियों की नजर टिकी रहती है। जबलपुर से रोजाना सैकड़ों गाड़ियां दिल्ली, मुंबई, नागपुर, रायपुर, बिलासपुर (Bilaspur mandi hari matar ka rate) और दंतेवाड़ा (Dantewada hari matar ka bhav) तक भेजी जाती हैं।
- ललितपुर और महोबा मंडी (उत्तर प्रदेश): बुंदेलखंड की ललितपुर मंडी और महोबा कृषि उपज मंडी देश के सबसे प्रमुख मटर व्यापारिक केंद्रों में शामिल हैं। ललितपुर मंडी में आज हरी मटर का क्या रेट है और महोबा मंडी में आज हरे मटर का क्या भाव है, यह तय करता है कि कानपुर, लखनऊ और दिल्ली की आजादपुर मंडी में मटर किस स्तर पर खुलेगी।
- मोहनपुरा और क्षेत्रीय मंडियां: मोहनपुरा मंडी में मटर का भाव (Mohanpura Mandi matar ka bhav today) और आसपास के ग्रामीण संग्रह केंद्रों से माल सीधे बड़ी मंडियों में रूट होता है, जिससे स्थानीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा बनी रहती है।
सबसे ज्यादा पैदावार देने वाली किस्में और उनका भाव पर असर
मंडी में व्यापारी केवल ढेरी नहीं देखते, बल्कि फलियों की लंबाई, दानों की मिठास और दानों की संख्या के आधार पर बोली लगाते हैं:
- एडवांटा जीएस-10 (GS-10): यदि किसान भाइयों के मन में सवाल है कि सबसे ज्यादा पैदावार देने वाली मटर कौन सी है, तो व्यावसायिक रूप से जीएस-10 आज सबसे लोकप्रिय किस्मों में शीर्ष पर है। इसकी फली 9 से 10 सेमी लंबी, गहरे हरे रंग की और 8 से 10 मीठे दानों से भरी होती है। गहरे रंग और दानों के वजन के कारण मंडियों में इस किस्म को सामान्य मटर से ₹5 से ₹10 प्रति किलो अधिक भाव मिलता है।
- आर्केल (Arkel) व अगेती किस्में (AP-3, पूसा प्रगति): यह किस्में 50 से 60 दिन में तैयार हो जाती हैं। अगेती बाजार पकड़ने के लिए यह सबसे बेहतरीन मानी जाती हैं, जिससे सीजन की शुरुआत में किसानों को रिकॉर्ड तोड़ रेट मिलते हैं।
- आजाद पी-1 व काशी नंदिनी: सब्जी मंडी और लंबी दूरी के परिवहन के लिए यह किस्में काफी मजबूत मानी जाती हैं, क्योंकि इनकी फलियां ट्रांसपोर्ट में जल्दी पीली नहीं पड़तीं।
हरी मटर का मौसमी चक्र: कब मिलती है भारी तेजी और कब आती है मंदी?
हरी मटर के दाम पूरी तरह आवक के दबाव और तापमान पर निर्भर करते हैं:
- शुरुआती अगेती उछाल (अक्टूबर से नवंबर): सीजन की शुरुआत में जब पंजाब, हिमाचल या अगेती बुवाई वाला माल मंडियों में आता है, तो आवक बहुत सीमित होती है। इस समय शादियों की मांग निकलने से थोक भाव ₹80 से ₹120 प्रति किलो और खुदरा में ₹150 प्रति किलो तक बिकते हैं।
- चरम आवक और मंदी का दौर (दिसंबर से जनवरी): जब जबलपुर, ललितपुर और महोबा बेल्ट की मुख्य फसल एक साथ टूटती है, तो मंडियों में ट्रकों की कतारें लग जाती हैं। भारी आवक के कारण थोक भाव ₹15 से ₹25 प्रति किलो के दायरे में आ जाते हैं।
- फ्रोजन मटर इंडस्ट्री का सहारा: जब बाजार में बंपर आवक से कीमतें नीचे आने लगती हैं, तब बड़ी फूड प्रोसेसिंग कंपनियां (जैसे सफल आदि) मटर छीलने और माइनस तापमान में फ्रीज करने के लिए भारी थोक खरीद शुरू करती हैं। इससे भाव एक निश्चित स्तर से नीचे नहीं गिरते और बाजार को सहारा मिलता है।
सूखे मटर का भाव (Sukhe Matar Ka Bhav): घाटे से बचने का विकल्प
हरी मटर उगाने वाले किसानों के पास यह बड़ा लाभ होता है कि यदि किसी वर्ष मौसम खराब होने या मंडियों में अत्यधिक मंदी आने से हरी तुड़ाई का खर्च भी न निकल रहा हो, तो वे फसल को खेत में ही सूखने के लिए छोड़ सकते हैं।
- पूरी तरह पकने के बाद इसकी कटाई करके सूखा मटर तैयार किया जाता है।
- सूखे सफेद और हरे मटर का उपयोग छोले-कुल्चे, चाट, नमकीन और दाल के रूप में सालभर होता है।
- सूखे मटर को किसान भाई सुरक्षित भंडारण (Storage) में रखकर ऑफ-सीजन में अच्छे भाव पर बेच सकते हैं।
थोक फली भाव और 1 किलो छीले हुए दाने के खुदरा रेट में अंतर
उपभोक्ता अक्सर पूछते हैं कि जब मंडी में हरी मटर ₹20 किलो बिक रही है, तो खुदरा बाजार में छीले हुए दाने ₹70 से ₹80 प्रति किलो क्यों मिल रहे हैं? इसके पीछे का गणित:
- छिलके का भारी वजन (Shelling Ratio): हरी मटर की फली में केवल 40% से 45% ही शुद्ध दाना निकलता है, जबकि 55% से 60% वजन छिलके का होता है। यानी 1 किलो शुद्ध दाना निकालने के लिए कम से कम सवा दो से ढाई किलो फली की जरूरत होती है।
- पसीजने और सड़न का नुकसान: फली बंद बोरी में रहने पर गर्मी छोड़ती है। 24 घंटे के सफर में 5% से 8% फलियां पीली पड़ जाती हैं या दाने अंकुरित होने लगते हैं।
- छिलाई और लेबर खर्च: खुदरा दुकानदार को हाथ से फली छीलने और छंटाई करने में अतिरिक्त मजदूरी लगानी पड़ती है।
मंडी में सबसे ऊंची बोली पाने के 4 व्यावहारिक सुझाव
- ओस सूखने के बाद ही तुड़ाई करें: सुबह खेत में अत्यधिक ओस या नमी के समय फलियां न तोड़ें। गीली फलियों को बोरी में पैक करने पर अंदर फंगस लगने और फलियों के काले पड़ने का खतरा रहता है। दोपहर से पहले सूखी फली तोड़ना सबसे सुरक्षित है।
- चपटी (बिना दाने वाली) फली अलग रखें: केवल पूरी तरह भरी हुई और कड़क फलियों की ही पैकिंग करें। आधी भरी या चपटी फलियों को अलग छांट लें, क्योंकि चपटी फली देखते ही व्यापारी पूरी ढेरी की बोली गिरा देते हैं।
- जालीदार बोरियों (Mesh Net Bags) का इस्तेमाल: हरी मटर को कभी भी प्लास्टिक के सीलबंद कट्टों में न भरें। हवादार लाल या हरी जालीदार बोरियों में 40-50 किलो की पैकिंग करें ताकि हवा लगती रहे और माल ताजा बना रहे।
- प्रमुख मंडियों के दैनिक मॉडल भाव पर नजर: माल गाड़ी में लोड करने से पहले जबलपुर, ललितपुर, इंदौर और आजादपुर जैसी बड़ी मंडियों के दैनिक मॉडल रेट और आवक का विश्लेषण जरूर करें।
हरी मटर की बाजार दरें दैनिक आवक, मौसम के मिजाज और माल की ताजगी पर निर्भर करती हैं। सही समय पर तुड़ाई, साफ-सुथरी ग्रेडिंग और प्रमुख मंडियों के रुख को समझकर बिक्री करने से किसान भाई अपनी मेहनत का सबसे अच्छा और लाभकारी मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।